कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।।
नफ़रत की दुनिया मे क्या रखा है यारों,
कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।
एक बार ही सही
उन परिंदों की,
उड़ान को देख लीजिए।
तलाश तो होगी आपको सुकून की नींद की,
कभी अपने कर्मो को देख लीजिए।
माँगते हो हर से अपने लिए बरक़त,
कभी दूसरे के फ़रियाद को सुन लीजिए।
आप कहते मैं मैं ही श्रेष्ट हूँ,
कभी परमात्मा की शक्ति को देख लीजिए।
क्रोध से उबल के रौद्र रूप दिखाते हो,
कभी स्थिर सागर को देख लीजिए।
महल- मकानों में रह के आपस में मिठास जगाना,
कभी गाँव में गाँव की एकता को रह के देख लीजिए।
नफ़रत की दुनिया मे क्या रखा है यारों,
कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।।
-अंकित शेखर✍
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