Monday, October 5, 2020

कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।।

कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।।

नफ़रत की दुनिया मे क्या रखा है यारों,
कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।

एक बार ही सही
उन परिंदों की,
उड़ान को देख लीजिए।

तलाश तो होगी आपको सुकून की नींद की,
कभी अपने कर्मो को देख लीजिए।

माँगते हो हर से अपने लिए बरक़त,
कभी दूसरे के फ़रियाद को सुन लीजिए।

आप कहते मैं  मैं ही श्रेष्ट हूँ,
कभी परमात्मा की शक्ति को देख लीजिए।

क्रोध से उबल के रौद्र रूप दिखाते हो,
कभी स्थिर सागर को देख लीजिए।

महल- मकानों में रह के आपस में मिठास जगाना,
कभी गाँव में गाँव की एकता को रह के देख लीजिए।

नफ़रत की दुनिया मे क्या रखा है यारों,
कभी फुर्सत से ज़िन्दगी जी लीजिए।।

-अंकित शेखर✍
  लेखक

Thursday, September 17, 2020

motivational

हम किस लिए इस दुनिया में आये है।कभी आपने सोचा है ,आपका सवाल होगा नहीं तो।हम कुछ पाने के लिए आये।कोई प्रेम के रूप में,कोई नफ़रत के रूप में, कोई ज्ञानी के रूप में,कोई अहंकारी के रूप में,कोई इंसानियत के रूप में,कोई हैवान के रूप में और हाँ कोई परिवार के रूप में।तो हम किसी ना किसी रूप में आये है,जिसकी लालसा प्रत्येक प्राणी में होती है।कोई ऐसा नहीं है जिससे कोई मोह-माया ना हो।कभी क्या आपका ध्यान इस ओर गया है,की हम किस लिए आये है।सोचिएगा जरूर!! आपके सवाल का जवाब आपके ही पास हैं।।😊

Tuesday, August 18, 2020

कविता

ईस्वर को ढूंढना है तो,ईस्वर को जानो।

ईस्वर को ढूंढ़ना है, 
तो ईस्वर को जानो।
आत्मा को तृप्त करना है, 
तो कर्म को जानो। 
ये संसार की माया में, 
अपना महत्व को जानो।
जो दिया वह लेता भी है ,
अपनी गलती को जानो। 
हम स्वार्थी ना हो जाये ,
मन को काबू करना जानो।
वो शिक्षा ही है जो सिखाता है,
ऐसे गुरु का स्पर्श,मोल और पवित्रता को जानो। 
रूप- रंग का भेद ना करना,
प्रेम की भक्ति को जानो। 
कटुता से उपहास ना करना ,
ज्ञान की शक्ति को जानो।
इस कार्य में तुम अलग नहीं,
यही विधाता का लीला है 
उनकी महिमा को जानो।
ईस्वर को ढूंढना है तो,
ईस्वर को जानो।

अंकित शेखर✍
लेखक

Tuesday, January 28, 2020

shyari

सूरज की लालिमा
जैसा चमकते रहना।
बुलंदी को पाने के लिए भटकते रहना। 
उम्मीद है मुलाकात बहुत ही शानदार होगी
अपनी यही सोच के साथ हमेशा मुस्कुराते रहना।।
-😊लेखक
अंकित शेखर

Shyari

शब्दों को जो समझ गए
वो शब्द ही निराले है।
वैसे तो सामने से तो
हम खुद को पसंद करते है।
लेकिन अपनी कर्मों से 
औरों की भी पसंद बन जाते है।।
😊 -लेखक
अंकित शेखर