Wednesday, November 14, 2018

चाहत होती है

*चाहत होती है*

उन परिंदों में एक उड़ने की
चाहत होती है कुछ पाने की

एक छोटा सा बच्चा भी तरसता है 
माँ की ममता पाने की

पेड़-पौधे को बढ़ाते है
चाहत होती है फल-फूल को पाने की

पानी तो जीवन का आधार है
चाहते होती है प्यास भुजाने की

दोस्त परिवार संग मिलते है
एक रिश्ता को निभाने की

आज का नज़रिया भी बदल चुका है
चाहते है सब कुछ पर
ज़िन्दगी ने ठान रखी है परखने की।

अंकित शेखर(किट्टी)✍
लेखक
धनबाद

No comments:

Post a Comment