Tuesday, August 18, 2020

कविता

ईस्वर को ढूंढना है तो,ईस्वर को जानो।

ईस्वर को ढूंढ़ना है, 
तो ईस्वर को जानो।
आत्मा को तृप्त करना है, 
तो कर्म को जानो। 
ये संसार की माया में, 
अपना महत्व को जानो।
जो दिया वह लेता भी है ,
अपनी गलती को जानो। 
हम स्वार्थी ना हो जाये ,
मन को काबू करना जानो।
वो शिक्षा ही है जो सिखाता है,
ऐसे गुरु का स्पर्श,मोल और पवित्रता को जानो। 
रूप- रंग का भेद ना करना,
प्रेम की भक्ति को जानो। 
कटुता से उपहास ना करना ,
ज्ञान की शक्ति को जानो।
इस कार्य में तुम अलग नहीं,
यही विधाता का लीला है 
उनकी महिमा को जानो।
ईस्वर को ढूंढना है तो,
ईस्वर को जानो।

अंकित शेखर✍
लेखक

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