ये युवा !!
मुश्किलों से घबराना नहीं
चोट खाओ फिर भी
मुस्कुराना वही
तलाश करते रहो हरदम
तुम खुद को
हाथ के लखीरों से
पहचान जाओ खुद को
यकीन करो तुम भी एक
दिन छु लोगे उस मोती को
जहाँ ठहरे हुए सागर भी
लहर लाने को तैयार हो
जीवन के उतार चढ़ाऊँ सीख लो
करो चेतना ज्ञान का
भीख लो
सूर्ये की लालिमा भी
भिकारने को बेताब हो
ये जन्म भूमि ही
कर्म भूमि है
ईश्वर ने ऐसा वरदान
दिया हो
प्रफुल्लित मन से आनंद
लो
हस्ते हुए आज को जियो
देश भी युवा से हो
देश का गौरव भी युवा हो
शान से जीना
शान से मारना
दिल से कहते अपना देश
हिंदुस्तान हो।।
लेखक
अंकित शेखर✍
धनबाद
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