मालूम हो मैं तेरी परछाई हूँ।
तुझको तंग करके,
मैं पर्दे में चुप जाऊँ।
धीरे-धीरे तुम मुझको,
ढूंढ़ने के लिये आओ।
ओ भैया! मालूम हो मैं तेरी परछाई हूँ,
मेरे बिना तुम नहीं रह पाओ।।
खेल-खुद संग खेलके,
मैं चोट से रो जाऊँ।
पास तुम गोद में लेके,
मुझको थपकी देखे चुप कराओ।
ओ भैया! मालूम हो मैं तेरी परछाई हूँ,
मेरे बिना तुम नहीं रह पाओ।।
होली के रंग से,दीवाली के दीपों से,
मैं सदा खुश हो जाऊँ।
रिश्तों के त्योहारों में,रक्षा के लिए,
धागा को बाँध कर बँधन में बन जाओ।
ओ भैया! मालूम हो मैं तेरी परछाई हूँ,
मेरे बिना तुम नहीं रह पाओ।।
उम्र के इस पड़ाव में,
विवाह के लिए तैयार हो जाऊँ।
बिदाई देके तुम इस पल में,
सब नाता तोड़ जाओ।
ओ भैया! मालूम हो मैं तेरी परछाई हूँ
मेरे बिना तुम नही रह पाओ।।
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